आदिगुरु शंकराचार्य हिन्दू धर्म के रक्षक एवं पुनरुद्धारक

आठवीं सदी के उत्तरार्ध में जब भारतवर्ष में सनातन धर्म अपने मूल अस्तित्व को खोने लगा था, बौद्ध, जैन आदि धर्मों ने सनातन धर्म की सत्ता को लगभग समाप्त ही कर दिया था, सनातन मतावलम्बी भी वैदिक शास्त्रों को भुलाकर अपने-अपने मत मानने लगे थे, ऐसे समय में एक ऐसे सन्त की आवश्यकता थी, जो […]

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अदम्य शक्ति है अग्निहोत्र में

स्वस्थ और नीरोगी जीवन के लिए शुद्ध हवा, स्वच्छ जल, अप्रदूषित अन्न और फल आदि की आवश्यकता होती है, लेकिन मानव की भोगलिप्सा इन सुलभ चीजों को अब दुर्लभ बना रही है| आज प्रकृति बहुत अंशों में प्रदूषित हो चुकी है| प्रदूषण से प्रकृति को कैसे मुक्त बनाया जाए? इसके बहुत सारे उपाय हैं, उनमें […]

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अक्षय तृतीया सत्ययुग के प्रारम्भ की तिथि

हमारे देश के पर्वों और उत्सवों में से कुछ तो ॠतु पर्व हैं, जिनमें नई फसल पकने का आमोद-प्रमोद और ॠतु परिवर्तन का उल्लास रचा-बसा होता है| कुछ धार्मिक पर्व हैं, जो देवी-देवताओं को समर्पित होते हैं तथा कुछ लोक पर्व हैं, जो कि किसी ऐतिहासिक घटना के आधार पर लोकमानस ने प्रारम्भ किए थे| […]

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40 दिन चला था राम-रावण महायुद्ध

Published : October, 2008 आश्‍विन शुक्ल दशमी अर्थात् ‘दशहरा’ को जिस युद्ध की परिणति भगवान् राम की विजय के रूप में हुई, वह युद्ध ४० दिन तक चला था| सेतुबन्ध के उपरान्त भगवान् राम सेना सहित पौष माह के अन्त में लंका पहुँच गए थे| माघ कृष्ण पक्ष में अंगद दूत बनकर रावण की सभा […]

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पराशक्तियों से सम्पर्क ‘सिक्स्थ सेन्स’ का रहस्य

Published : March, 2008 लेखक को कुछ दिनों पूर्व एक ऐसे व्यक्ति की जन्मपत्रिका देखने को मिली, जिसका पारलौकिक शक्तियों से सम्पर्क था अर्थात् उसमें सिक्स्थ सेन्स की शक्ति थी| उसे मृत आत्माएँ एवं भूत-प्रेत दिखते थे| यद्यपि उनसे उसे किसी प्रकार की हानि नहीं हुई, परन्तु उनके प्रभाव से उसे ऐसी घटनाओं का सामना […]

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‘बाबाजी’ जो ईसा के युग में भी थे और आज भी हैं

Published : July, 2008 कहा जाता है कि हिमालय की गुफाओं में ऐसे अनेक सिद्ध पुरुष हैं, जिनकी आयु सैंकड़ों—हजारों वर्ष है| वे इतनी लम्बी आयु योग के माध्यम से प्राप्त करते हैं| ऐसे योगियों का परिचय आम जनता से नहीं हो पाता है, किन्तु वे एक विशेष उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अथवा आत्म […]

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आदि शंकराचार्य के बाद शंकराचार्य

Published : April, 2009 जैसा कि हम जानते हैं आद्यगुरु शंकराचार्य जी ने सनातन धर्म के कल्याणार्थ सम्पूर्ण भारत में पृथक्-पृथक् दिशाओं में चार मठों की स्थापना की| ये मठ हैं : 1. वेदान्त ज्ञानमठ, शृंगेरी (दक्षिण भारत) 2. गोवर्धन मठ, जगन्नाथपुरी (पूर्वी भारत) 3. शारदा (कालिका) मठ, द्वारका (पश्‍चिम भारत) 4. ज्योतिर्पीठ, बद्रिकाश्रम (उत्तर […]

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