कुल्लू दशहरा-एक अनोखी परम्परा

सामान्य तौर पर भारत में दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के स्वरूप में रावण दहन के रूप में मनाया जाता है, परन्तु हिमाचल प्रदेश के कुल्लू नामक स्थान पर दशहरा उत्सव को मनाने का कारण यह नहीं होकर कुछ और है| स्थानीय विश्‍वास के अनुसार कुल्लू में दशहरा उत्सव जो कि सात […]

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कुमारी पूजन से प्रसन्न होती हैं दुर्गा

नवरात्र में जितना दुर्गापूजन का महत्त्व है, उतना ही कुमारी पूजन का भी महत्त्व है| देवीपुराण के अनुसार इन्द्र ने जब ब्रह्माजी से भगवती दुर्गा को प्रसन्न करने की विधि पूछी, तो उन्होंने सर्वोत्तम विधि के रूप में कुमारी पूजन ही बताया और कहा कि भगवती जप, ध्यान, पूजन और हवन से भी इतनी प्रसन्न […]

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किस तिथि को हुआ रावण का वध?

आश्‍विन शु. 10 • आश्‍विन शु. 09 • वैशाख कृष्ण 30 • वैशाख कृष्ण 14 सामान्यत: यह माना जाता है कि आश्‍विन शुक्ल दशमी को रावण का वध हुआ था, परन्तु शास्त्रों और विद्वानों के द्वारा इस तिथि को रावण वध के रूप में मान्यता नहीं दी जाती है| रावण वध की तिथियों के निर्धारण […]

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ऐसे प्राप्त की मेघनाद ने अमोघ शक्तियॉं

राम-रावण युद्ध में रावण के पुत्र मेघनाद ने तीन बार भगवान् राम और उनकी सेना को संकट में डाल दिया था| इन्द्र पर विजय प्राप्त करने वाला मेघनाद अपने पिता से भी अधिक शक्तिशाली था| उसने ये शक्तियॉं ७ यज्ञों का अनुष्ठान करके प्राप्त की थीं| लंका में निकुम्भिला उपवन में उसने एक मन्दिर का […]

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ऐसी थी भगवान् की व्यूह रचना

तीनों लोकों के विजेता राक्षसराज रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान् श्रीराम ने समय-समय पर सेना की विभिन्न प्रकार से व्यूह रचना की| उस विशाल वानर-ॠक्ष-लंगूर सेना का प्रबन्धन करना ही बड़ा कठिन था| तुलसीदासजी कहते हैं कि उस सेना में 18 पद्म तो यूथपति ही थे| महर्षि वाल्मीकि के अनुसार नील की […]

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क्या विजयादशमी के दिन हुआ था रावण वध

शरद् ॠतु के अवतरण की घोषणा करते हुए नवरात्र जैसे ही आते हैं, तो साथ ही रामलीला की गूँज और गरबा जैसे नृत्यों की बहार को भी साथ लाते हैं| इन नवरात्र में अपनी कुल परम्परा के अनुसार देवी का पूजन किया जाता है| भगवान् राम के पूजन की परम्परा ने भी पिछले काफी समय […]

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गया श्राद्ध का महत्त्व

श्राद्ध एवं पिण्डदान आदि के लिए समस्त तीर्थों में गया तीर्थ का विशेष महत्त्व है| धर्मशास्त्रों के अनुसार मृत्यु के पश्‍चात् व्यक्ति पितृ योनि में पितृलोक में निवास करता हैऔर वहॉं रहकर सुख-दु:ख आदि का भी अनुभव करता है| यदि मृतक के पुत्र-पौत्रादि उसके निमित्त दान-पुण्य एवं श्राद्धादि करते हैं, तो उसे सुख की प्राप्ति […]

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ऐसे भी कर सकते हैं श्राद्ध

निर्धन होने की स्थिति में केवल शाक से श्राद्ध करना चाहिए| यदि शाक भी नहीं हो, तो घास काटकर गाय को खिला देने मात्र से श्राद्ध सम्पन्न माना जाता है| यदि किसी कारणवश घास भी उपलब्ध न हो, तो किसी एकान्त स्थान पर जाकर श्रद्धा एवं भक्तिपूर्वक अपने हाथों को ऊपर उठाते हुए पितरों से […]

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ऐसे करें श्राद्ध

शास्त्रों में कहा गया है कि ‘श्रद्धया पितृन् उद्दिश्य विधिना क्रियते यत्कर्म तत् श्राद्धम्’ अर्थात् श्रद्धापूर्वक पितरों के उद्देश्य से जो कर्म किया जाता है, वह श्राद्ध कहलाता है| इसका मूल आशय यह है कि श्राद्धकर्म में सर्वप्रमुख श्रद्धा ही होती है| श्रद्धा के सामने अन्य विधि-विधान या उपक्रम गौणमात्र रह जाते हैं| महर्षि पराशर […]

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आदिगुरु शंकराचार्य हिन्दू धर्म के रक्षक एवं पुनरुद्धारक

आठवीं सदी के उत्तरार्ध में जब भारतवर्ष में सनातन धर्म अपने मूल अस्तित्व को खोने लगा था, बौद्ध, जैन आदि धर्मों ने सनातन धर्म की सत्ता को लगभग समाप्त ही कर दिया था, सनातन मतावलम्बी भी वैदिक शास्त्रों को भुलाकर अपने-अपने मत मानने लगे थे, ऐसे समय में एक ऐसे सन्त की आवश्यकता थी, जो […]

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