त्वचा रोग : कारण एवं निदान

विभिन्न शारीरिक रोगों के अन्तर्गत त्वचा रोग सर्वाधिक रूप से पाए जाने वाला रोग है| वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण के कारण इस रोग के रोगियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है| यही कारण है कि गॉंवों की अपेक्षा शहरों में इस रोग से पीड़ित व्यक्तियों की संख्या अधिक है| त्वचा रोग अनेक रूपों […]

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डाउ़िंजग पेड़ की टहनी या धातु की छड़ से भविष्यवाणी

डाउ़िंजग एक ऐसी रहस्यमयी विधा है, जिसके अन्तर्गत भूमि में दबी वस्तुओं, जल की गहराई, विभिन्न धातुओं, बहुमूल्य रत्नों, भूमिगत तेल या हड्डियों का पता लगाया जाता है| यह कार्य पेड़ की छोटी टहनी या तॉंबा, पीतल इत्यादि धातुओं की छड़ की सहायता से किया जाता है| सर्वाधिक रूप से भूमिगत जल का पता लगाने […]

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जन्मपत्रिका से रोग विचार

‘मेडिकल एस्ट्रोलॉजी’ फलित ज्योतिष की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत विभिन्न रोग एवं उनके कारणों का ज्योतिष के आधार पर अध्ययन किया जाता है| प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी रोगों से अवश्य पीड़ित होता है| कुछ व्यक्ति किसी विशेष रोग से बार-बार पीड़ित होते हैं, तो कुछ व्यक्ति किसी विशेष समय में […]

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जन्मपत्रिका से जानें सन्तान सुख

ज्योतिष शास्त्र में सन्तान सम्बन्धी विचार विशेष रूप से विचारणीय विषय है| फलित ज्योतिष की सभी विधाओं में इसका पृथक् से विस्तृत वर्णन प्राप्त होता है| फलित शास्त्र की सबसे महत्त्वपूर्ण विधा जन्मपत्रिका द्वारा फलकथन में पञ्चम भाव से सन्तान विचार किया जाता है| इस भाव की सुत भाव के रूप में संज्ञा दी गई […]

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चाय की पत्तियॉं भी बताती हैं भविष्य

चाय की पत्तियों से भविष्य कथन एक अनूठी विधा है| इसे ‘टेसिओग्राफी’ के नाम से जाना जाता है| इसके अन्तर्गत चाय पीने के बाद बची हुई चाय की पत्तियों या पीने के बाद कप में बची हुई कॉफी अथवा ग्लास के पैंदे में बची हुई मदिरा से बनी विभिन्न आकृतियों का अध्ययन किया जाता हैऔर […]

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कॅरियर निर्धारण में नवांश का महत्त्व

भारतीय ज्योतिष में षोडश वर्गों के अन्तर्गत नवांश वर्ग का विशेष महत्त्व है| राशि या लग्न वर्ग के पश्‍चात् फल विचार में नवांश वर्ग को ही प्रमुख स्थान प्राप्त है, इसलिए नवांश वर्ग को लग्न रूपी शरीर की आत्मा कहा जाता है| विंशोपक बल विचार में लग्न को जहॉं ३० प्रतिशत भार मिलता है, वहीं […]

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कॅरियर चयन में विचारणीय भाव

जन्मपत्रिका से आजीविका निर्णय की बात आते ही सहसा ध्यान कुण्डली के कर्म भाव की ओर आकृष्ट हो जाता है| मस्तिष्क दशम भाव तथा दशमेश की स्थिति को परखने लगता है| अन्तत: परिणाम यह निकलता है कि मस्तिष्क किसी भी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता है, क्योंकि दशम भाव तथा दशमेश जिस कार्यक्षेत्र को बता […]

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कर्क लग्न में कॅरियर विचार

मिथ्ाुन लग्न से कॅरियर विचार करने के पश्‍चात् कर्क लग्नोत्पन्न जातकों का कॅरियर विचार करते हैं| कर्क लग्न का स्वामी चन्द्रमा होता है| कर्क लग्नेश चन्द्रमा मन का स्वामी होता है तथा यह चंचलता का भी प्रतीक है, अत: चन्द्रमा अश्ाुभ होने पर ऐसे जातकों में किसी भी एक कार्य को लेकर स्थिरता नहीं होती […]

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कब होगा आपका विवाह?

भारतीय संस्कृति की आश्रम व्यवस्था में गृहस्थाश्रम का अत्यधिक महत्त्व है, ब्रह्मचर्याश्रम, गृहस्थाश्रम, वानप्रस्थाश्रम एवं संन्यास आश्रम, इन चारों में गृहस्थाश्रम ही है, जो शेष तीनों आश्रमों का निर्वहण करता है| इस आश्रम का प्रारम्भ विवाह से होता है| शास्त्रों में गर्भाधान, नामकरण आदि षोडश संस्कारों का वर्णन है| विवाह भी इनमें से ही एक […]

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कन्या लग्न में कॅरियर विचार

सिंह लग्न के पश्‍चात् अब कन्या लग्न में कार्यक्षेत्र सम्बन्धी योगों का विवेचन करते हैं| कन्या राशि द्विस्वभाव संज्ञक है, जिसका स्वामी बुध होता है| कन्या बुध की उच्च, मूल और स्वराशि तीनों ही होने के कारण कन्या बुध की प्रिय राशि है| बुध यदि कन्या लग्न में अकेला ही स्थित हो, तो राजयोगकारी होता […]

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