कैसा रहेगा मकर का शनि मिथुन राशि के लिए?

Saturn Transit
मिथुन राशि
(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)

मिथुन राशि वालों के लिए मकर राशि में शनि का गोचर शुभफलदायक नहीं है। जन्मराशि से अष्टम भाव में शनि का गोचर होने से सामान्यत: स्वास्थ्य प्रभावित होता है। साथ ही घरेलू समस्याएँ एवं कार्यक्षेत्र में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं।
इस गोचरावधि में स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है। यदि आप किसी दीर्घावधि रोग से ग्रस्त हैं, तो उस रोग की तीव्रता में वृद्धि हो सकती है। स्वस्थ व्यक्ति भी इस गोचरावधि में किसी न किसी रोग के शिकार हो सकते हैं। इसलिए खान-पान आदि के सम्बन्ध में पूर्ण सतर्कता रखनी चाहिए और बीमारी होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से ही सम्पर्क करना चाहिए। गलत इलाज होने के भी इस दौरान योग बन रहे हैं। वाहनादि चलाते समय भी ध्यान रखने की आवश्यकता है, क्योंकि दुर्घटना का भी भय रहेगा।
पारिवारिक सुख की दृष्टि से यह गोचरावधि मध्यम फलप्रद है। इस गोचरावधि में गृहक्लेश आदि की स्थितियॉं बन सकती हैं। किसी परिजन के स्वास्थ्य को लेकर भी चिन्ता हो सकती है। मान-प्रतिष्ठा के क्षेत्र में सावधानी रखने की आवश्यकता है, क्योंकि इस दौरान अपयश एवं अपमान की स्थितियॉं भी बन सकती हैं। परिजन आदि के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है। परिजनों से दूर रहने की परिस्थितियॉं बन सकती है।
आर्थिक दृष्टि से शनि का अष्टम भाव में गोचर सतर्कता की अपेक्षा रखता है। इस दौरान जोखिमपूर्ण धननिवेश से बचना चाहिए। किसी को उधार आदि देने में भी सतर्कता रखनी चाहिए। इस दौरान धनहानि होने के योग बनते हैं। चोरी, दुर्घटना, आपदा आदि के कारण आर्थिक संकट का समाना करना पड़ सकता है। ॠणभार में वृद्धि हो सकती है। आकस्मिक खर्चे परेशान कर सकते हैं। आय के स्रोतों में बाधा उत्पन्न हो सकती है। आय में कमी एवं खर्चों में वृद्धि से घर की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
कॅरिअर की दृष्टि से यह गोचरावधि बहुत अनुकूल नहीं है। नौकरीपेशा वर्ग को इस गोचरावधि में स्थानान्तरण आदि की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जो व्यक्ति अस्थायी नौकरी में हैं अथवा प्राईवेट नौकरी में हैं, उन्हें नौकरी को बचाए रखना भी एक बड़ा कार्य रहेगा। इस दौरान उच्चाधिकारियों से तनावपूर्ण स्थिति बन सकती है। चार्जशीट आदि की भी आशंका रहेगी। नियम एवं कानूनों का उल्लंघन न करें। समय पर कार्यों को जिम्मेदारी के साथ पूर्ण करने का प्रयास करें।
जहॉं तक व्यवसाय का प्रश्‍न है, तो व्यवसायियों के लिए भी यह गोचरावधि शुभफलप्रद नहीं है। एक ओर जहॉं व्यापार में मन्दी का सामना करना पड़ सकता है, वहीं दूसरी ओर लाभ में कमी अथवा घाटा होने की आशंका रहेगी। ॠणभार में वृद्धि हो सकती है। उधार आदि अटक सकती है। इसलिए उधार आदि देते समय सावधानी रखें। व्यवसाय की आन्तरिक समस्याएँ भी परेशान कर सकती हैं। सरकारी निर्णयों से भी परेशानी का अनुभव हो सकता है।
विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल नहीं है। अध्ययन में बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही, अपेक्षानुरूप परीक्षा परिणाम प्राप्त न होने से कुछ हद तक निराशा भी हो सकती है। संगति का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस गोचरावधि में बुरी संगति में पड़ने और गलत आदतें लगने की भी आशंका रहेगी। प्रतियोगिता परीक्षार्थियों के लिए भी समय बहुत अनुकूल नहीं है। हॉं, यह अवश्य है कि जो व्यक्ति अनुसंधान आदि के क्षेत्र में हैं, उनके लिए समय अनुकूल रहेगा। विदेश में जो अध्ययन करना चाहते हैं, उन्हें भी अवसर मिल सकते हैं।
राहतकारी उपाय : जन्मराशि से अष्टम भावगत शनि का गोचर होने के कारण अशुभफलों की अधिकता रहेगी। यह आपके लिए अष्टम ढैया है, इसलिए निम्नलिखित उपाय आवश्यक हैं :
1. ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:।’ मन्त्र का जप करना चाहिए।
2. निम्नलिखित स्तोत्र का पाठ करना चाहिए :
ॐ नमस्ते कोणसंस्थाय पिंगलाय नमोऽस्तु ते।
नमस्ते बभ्रुरूपाय कृष्णाय च नमोऽस्तु ते।
नमस्ते रौद्रदेहाय नमस्ते चांतकाय च।
नमस्ते यमसंज्ञाय नमस्ते सौरये विभो॥
नमस्ते मन्दसंज्ञाय शनैश्‍चर नमोऽस्तु ते।
प्रसादं कुरु देवेश दीनस्य प्रणतस्य च॥
3. सातमुखी रुद्राक्ष गले में धारण करना चाहिए।
4. काले घोड़े की नाल का छल्ला मध्यमा अंगुली में धारण करें।
5. पीपल के पेड़ पर नित्य जल चढ़ाएँ तथा वहॉं तेल का दीपक जलाएँ।
6. शनिवार को सूर्योदय से पूर्व अथवा सूर्यास्त के पश्‍चात् कॉंसे अथवा लोहे के पात्र में तिल्ली का तेल भरकर उसमें अपना मुख देखकर और एक लौंग डालकर उसे दान करना चाहिए।
7. भगवान् शिव एवं हनूमान् जी की उपासना करें।