कोरोना वायरस और ज्योतिष (भाग-1)

Corona in Astrology

‘कोरोना वायरस डिजीज-2019’ (Coronavirus Disease-2019) जिसे संक्षेप में ‘COVID-19’ कहा जाता है, को विश्‍व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ‘वैश्‍विक महामारी’ घोषित किया है| यह बीमारी सीवियर एक्यूट रेसीपिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस-२ (डअठड-उेत-२) नामक वायरस के कारण होती है| इस बीमारी का आरम्भ नवम्बर, 2019 में चीन के वुहान शहर से हुआ और लगभग 3 महीनों में यह वैश्‍विक स्तर पर महामारी के रूप में परिवर्तित हो गई| इन पंक्तियों के लिखे जाने के समय दो लाख से भी अधिक लोग इस बीमार से ग्रस्त हो चुके थे और लगभग 8100 लोग कालकलवित हो गए| भारत में भी अब तक 147 मामले सामने आए हैं| इस बीमारी में बुखार, खॉंसी, सॉंस में तकलीफ, निमोनिया इत्यादि होते हैं और बाद में रोग के जटिल होने पर किडनी आदि अंगों का एक-एक करके निष्क्रिय होना देखा गया है| इस रोग में श्‍वेत रक्त कणिकाएँ कम हो जाती हैं और रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती चली जाती है| इस रोग का अभी तक न तो कोई वैक्सिन (टीका) बन पाया है और न ही इसका कोई कारगर इलाज है| केवल लक्षणों का ही चिकित्सकीय प्रबन्धन किए जाने का प्रयत्न किया जाता है| यह रोग वृद्धों, मधुमेह, हृदय, अस्थमा इत्यादि रोगियों के लिए अधिक घातक है| अभी तक जो अध्ययन हुए हैंै, उनके अनुसार 70 से अधिक वर्ष की आयु के लोगों के लिए यह अधिक घातक हुआ है| 40 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए यह तुलनात्मक रूप से कम घातक है|
कोरोना वायरस रोग के ज्योतिषीय योग
कोरोना वायरस श्‍वसन तन्त्र पर मुख्यरूप से प्रहार करता है, इसलिए जिन व्यक्तियों का चतुर्थ भाव एवं चतुर्थेश तथा श्‍वसन तन्त्र का नैसर्गिक कारक बुध निर्बल, पीडित एवं पापग्रहों से दूषित होगा, तो वे इस रोग के प्रति संवेदनशील होते हैं| यह रोग व्यक्ति की रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होने पर अधिक सक्रिय होता है, इसलिए जिन व्यक्तियों का लग्न, लग्नेश एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता का कारक सूर्य पीड़ित, दूषित एवं निर्बल होगा, उन्हें इस रोग के प्रति संवेदनशील माना जा सकता है| यह एक वायरसजनित बीमारी है, फलतः राहु एवं केतु इसके कारक हैं| चूँकि यह संक्रामक बीमारी है और दीर्घकालिक प्रभाव उत्पन्न करती है, फलतः शनि, राहु एवं केतु इसके कारक बनते हैं| यह बीमारी आकस्मिक रूप से उत्पन्न होती है| इसलिए राहु और केतु इसके प्रमुख कारक के रूप में सामने आते हैं| चूँकि अभी तक यह बीमारी ला-इलाज है, इसलिए पुनः राहु-केतु इसके कारक बन जाते हैं| इस बीमारी के लक्षणों में तीव्र ज्वर उत्पन्न होता है, जो कि सूर्य के नैसर्गिक कारकत्व में आता है| यह रोग सूखी खॉंसी उत्पन्न करता है| इसका नैसर्गिक कारक शनि एवं राहु है| यह रोग मारक है, फलतः मारकेश एवं मारक भावों में स्थित ग्रह तथा अष्टम भाव में स्थित ग्रह या अष्टमेश की दशा इसके लिए उत्तरदायी हो सकती है| यह रोग अस्पताल में भर्ती करवाता है, इसलिए द्वादशेश अथवा द्वादश भाव में स्थित ग्रह की दशा भी इसके लिए उत्तरदायी हो सकती है| रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं श्‍वसनतन्त्र से सम्बन्धित होने के कारण लग्न एवं चतुर्थ भाव से सम्बन्धित ग्रहों या भावेशों की दशा आने पर इस रोग से पीड़ित होने की आशंका रहती है| राहु अथवा शनि के नक्षत्रों में स्थित ग्रहों की दशाओं में तथा लग्न, चतुर्थ, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित ग्रहों के नक्षत्रों में स्थित ग्रहों की दशा में भी इस रोग की आशंका होती है| आइए, कतिपय उदाहरण देखते हैं :
उदाहरण 1 : फ्रेंक रीस्टर
जन्म दिनांक : 03 जनवरी, 1974
जन्म समय : 11:50 बजे
जन्म स्थान : पेरिस
फेंक रीस्टर फ्रांस के संस्कृति मन्त्री हैं| मार्च, 2020 में इनकी कोरोना वायरस रिपोर्ट पॉजिटिव आयी| जन्मपत्रिका में चतुर्थ भाव एवं चतुर्थेश दोनों ही पीड़ित हैं और शनि-राहु एवं केतु के प्रभाव में हैं| चतुर्थेश बुध अस्तंगत है तथा सूर्य एवं राहु के मध्य स्थित है| इस प्रकार ये फेफड़े, अस्थमा एवं छाती से सम्बन्धित अन्य रोगों के प्रति संवेदनशील हैं| दिसम्बर, 2019 से ये राहु महादशा में राहु की अन्तर्दशा में बुध की प्रत्यन्तर्दशा के प्रभाव में हैं| राहु जहॉं दीर्घकालिक एवं ला-इलाज रोग का कारण बन रहा है, तो वहीं प्रत्यन्तर्दशानाथ बुध श्‍वसन तन्त्र से सम्बन्धित रोगों के होने का संकेत दे रहा है| राहु वायरसजनित रोगों का कारण होता है| रोग प्रतिरोधक क्षमता का कारक सूर्य राहु से युति बनाकर ग्रस्त है, वहीं लग्नेश गुरु एकादश भाव में अपनी नीच राशि में स्थित है तथा अष्टमेश शुक्र के साथ युत है| इस प्रकार रीस्टर की रोग प्रतिरोधक क्षमता से सम्बन्धित दुर्बलता के योग भी विद्यमान हैं| यद्यपि बुध सप्तमेश भी है, परन्तु बुध का चतुर्थ भाव पर पूर्ण दृष्टि प्रभाव है| ऐसी स्थिति में यह रोग घातक होगा, इसकी आशंका कम है|
उदाहरण 2 : टॉम हेंक्स
जन्म दिनांक : 09 जुलाई, 1956
जन्म समय : 11:20 बजे
जन्म स्थान : कॉनकोर्ड (केलिफोर्निया, यूएसए)
टॉम हेंक्स हॉलीवुड के प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता एवं प्रोड्यूसर हैं और दो बार के ऑस्कर विजेता हैं| ये ऑस्ट्रेलिया में एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, तब 12 मार्च, 2020 को कोरोना वायरस के शिकार हो गए| जन्मपत्रिका में चतुर्थ भाव शनि एवं राहु की उपस्थिति के कारण पीड़ित है| चतुर्थेश मंगल सप्तम भाव में कुम्भ राशि एवं पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में स्थित है| तृतीयेश-सप्तमेश शुक्र केतु से युत है| ये डायबिटीज रोग से भी पीड़ित हैं| जिस समय ये कोरोना वायरस से ग्रस्त हुए, उस समय ये मंगल महादशा में बुध की अन्तर्दशा में केतु की प्रत्यन्तर्दशा के प्रभाव में थे| महादशानाथ मंगल चतुर्थेश होकर सप्तम भाव में स्थित है, वहीं अन्तर्दशानाथ बुध श्‍वसन तन्त्र से सम्बन्धित मामलों का नैसर्गिक कारक है और अपने भाव से अष्टम में स्थित है| बुध स्वयं अस्तंगत है तथा आर्द्रा नक्षत्र में स्थित है और नक्षत्रेश राहु चतुर्थ भाव में स्थित होकर इस भाव को पीड़ित कर रहा है| प्रत्यन्तर्दशानाथ केतु यद्यपि दशम भावस्थ है, परन्तु वह रोहिणी नक्षत्र में है और उसका स्वामी चन्द्रमा द्वादश भाव में है| साथ ही, केतु वायरसजनित एवं आकस्मिक बीमारियों का कारक होता है| इनकी यह बीमारी कुछ हद तक जटिल हो सकती है|
उदाहरण 3 : रीटा विल्सन
जन्म दिनांक : 26 अक्टू., 1956
जन्म समय : 09:03 बजे
जन्म स्थान : लॉस ऐंजिल्स
यह हॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री, गायिका, गीतलेखिका एवं प्रोड्यूसर हैं| ये टॉम हेंक्स की पत्नी हैं| ये भी अपने पति के साथ ऑस्ट्रेलिया थीं और वहीं 12 मार्च को कोरोना वायरस से ग्रस्त हुईं| इनकी जन्मपत्रिका में चतुर्थ भाव में कुम्भ राशि है और उसका स्वामी शनि लग्न में राहु के साथ नक्षत्रीय युति बनाकर स्थित है| लग्नेश एवं चतुर्थेश में परस्पर राशि परिवर्तन हो रहा है| श्‍वसन तन्त्र का नैसर्गिक कारक बुध चतुर्थ से अष्टम भाव में सन्धिगत स्थिति में है| साथ ही अस्तंगत है| बुध मंगल के नक्षत्र में है| द्वादश भाव में सूर्य अपनी नीच राशि में है| 12 मार्च को जब ये कोरोना वायरस से ग्रस्त हुईं, तब चन्द्रमा की महादशा में गुरु की अन्तर्दशा में शनि की प्रत्यन्तर्दशा चल रही थी| अन्तर्दशानाथ गुरु दशम भाव में सूर्य के नक्षत्र में स्थित है और अपने भाव द्वितीय पर उसकी पूर्ण दृष्टि है| इस प्रकार यह द्वितीय मारक भाव का फल प्रदाता बन रहा है, वहीं इसके नक्षत्रेश सूर्य के कारण यह द्वादश भाव अर्थात् अस्पताल एवं रोग का कारक भी बन रहा है| प्रत्यन्तर्दशानाथ शनि चतुर्थेश होकर लग्न में राहु के साथ स्थित है, जो कि दीर्घकालक एवं आकस्मिक रोग तथा छाती से सम्बन्धित रोग के लिए उत्तरदायी हो रहा है| यह संक्रामक बीमारी का भी कारक है|
इसी प्रकार यह रोग चतुर्थ भाव-लग्न के पीडित एवं निर्बल होने पर इन भावों से सम्बन्धित ग्रह कारक ग्रह तथा शनि, राहु या केतु की प्रत्यन्तर्दशा में होता है|•