कोरोना वायरस और ज्योतिष (भाग-2)

Corona in Astrology
कोविड-19 से मृत्यु के योग

कोविड-19 घातक रोग होने के कारण इसके ज्योतिषीय योगों में भी मारक भाव, उनके स्वामी और उनमें स्थित ग्रहों की दशादि पीड़ितावस्था में देखी जाती हैं, परन्तु वे सदैव मृत्यु का कारण नहीं बनते, केवल निम्नलिखित स्थितियॉं हों, तो मृत्यु की सम्भावना होती है अन्यथा मृत्यु सम कष्ट या भय होता है, परन्तु रोगी हो सकता है :
1. मारक भाव, उसके स्वामी या उनमें स्थित ग्रहों के अतिरिक्त अष्टम भाव में स्थित ग्रह या उसके स्वामी अथवा शनि/राहु की भी दशा हो|
2. लग्नस्थ-द्वादशस्थ ग्रह की भी दशा हो|
3. रोगारम्भ के बाद लगातार प्रत्यन्तर्दशाएँ मारक प्रभाव रखती हों|
4. आयु के अन्तिम वर्षों में रोग हो और मारक दशाएँ हों|
उदाहरण 4 : टैरेंस मैकनेल्ली
जन्म दिनांक : 03 नवम्बर, 1938
जन्म समय : 01:38 बजे|
जन्म स्थान : सैंट पीटर्सबर्ग (फ्लोरीडा) (यूएस)
जन्मकुण्डली
अमेरिका के प्रसिद्ध प्लेराइटर एवं स्क्रीन राइटर टैरेंस मैकनेल्ली की 24 मार्च, 2020 को कोविड-19 बीमारी के कारण मृत्यु हो गई|
जन्मपत्रिका में लग्नेश सूर्य अपनी नीच राशि तुला में राहु के साथ उसी के नक्षत्र स्वाती में अष्टम से अष्टम भाव अर्थात् तृतीय भाव में स्थित है तथा सूर्य और शनि में परस्पर षडष्टक योग है, फलत: रोगप्रतिरोधक क्षमता में कमी के योग विद्यमान हैं| चतुर्थ भाव का स्वामी मंगल द्वितीय भाव में द्वादशेश चन्द्रमा के नक्षत्र हस्त में स्थित है और मारकेश (द्वितीयेश) बुध के साथ परस्पर भाव परिवर्तन सम्बन्ध बना रहा है| चतुर्थेश पर षष्ठेश-सप्तमेश शनि का पूर्ण दृष्टि प्रभाव है| श्‍वसनतन्त्र का नैसर्गिक कारक बुध गुरु के नक्षत्र में चतुर्थ भावस्थ है, परन्तु बुध निरयण भाव चलित में तृतीय भाव में स्थानान्तरित होकर राहु-केतु की धुरी में आ जाता है| बुध और राहु की नक्षत्रीय युति है तथा ग्रहणदोष कारक सूर्य से भी बुध युत है| चन्द्रमा शनि की कुम्भ राशि में सप्तम भाव में गुरु के नक्षत्र में है और नक्षत्रेश गुरु अपनी नीच राशि मकर में रोग भाव में स्थित होकर तथा षष्ठेश शनि से परस्पर भाव परिवर्तन कर रोग-मृत्यु भाव से सम्बन्धित फलदायक हो रहा है| इस प्रकार चतुर्थेश चन्द्रमा एवं बुध पीड़ित एवं रोगों के प्रति संवेदनशील हो रहे हैं, फलत: जातक फेफड़े एवं श्‍वसन तन्त्र सम्बन्धी रोगों के प्रति संवेदनशील है| जातक पूर्व में फेफड़े में कैंसर रोग से पीड़ित रहा| जातक जब कोरोना वायरस से पीड़ित हुआ, तब सूर्य महादशा में गुरु की अन्तर्दशा में मंगल की प्रत्यन्तर्दशा थी| अन्तर्दशानाथ गुरु पंचमेश-अष्टमेश होकर अपनी नीचराशि में षष्ठ भाव में है तथा षष्ठेश और अष्टमेश के बीच राशि परिवर्तन होने से गुरु रोग एवं मृत्यु भाव का कारक बन कर अपनी अन्तर्दशा में स्वास्थ्य की दृष्टि से अशुभफलदायक है| प्रत्यन्तर्दशानाथ मंगल चतुर्थेश होकर मारक भाव में है तथा दोनों मारकेश शनि एवं बुध के साथ परस्पर सम्बन्ध (दृष्टि एवं भाव परिवर्तन) बनाकर प्रबल मारक भी बन रहा है| आयु 81 वर्ष हो चुकी थी, फलत: इस अष्टमेश की अन्तर्दशा में मारक भावस्थ ग्रह की प्रत्यन्तर्दशा में मृत्यु जैसा फल प्राप्त हुआ|
उदाहरण 5 : लूसिया बोजे
जन्म दिनांक : 28 जनवरी, 1931
जन्म समय : 10:00 बजे
जन्म स्थान : मिलानो (इटली)
जन्मकुण्डली
लूसीया बोजे इटली की प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं| इनकी कोरोना वायरस के कारण हुए न्यूमोनिया के कारण 89 वर्ष की अवस्था में 23 मार्च, 2020 को मृत्यु हो गई| जन्मपत्रिका में लग्न में राहु की उपस्थिति है| लग्नेश गुरु चतुर्थ भाव में राहु के नक्षत्र में स्थित है तथा सूर्य के साथ षडष्टक स्थिति में है| लूसिया की मृत्यु बुध महादशा में शनि की अन्तर्दशा में बुध की प्रत्यन्तर्दशा में हुई थी|
अन्तर्दशानाथ शनि यद्यपि एकादशेश-द्वादशेश है, परन्तु द्वादश भाव पर पूर्ण दृष्टि एवं मूलत्रिकोण राशि कुम्भ की द्वादश भाव में उपस्थिति के फलस्वरूप शनि द्वादशेश के रूप में फलदायक रहा| ज्योतिष का सिद्धान्त है कि त्रिषडायेश या त्रिकेश शनि सभी मारक ग्रहों का अतिक्रमण करके स्वयं प्रबल मारक बन जाता है| शनि यहॉं अस्पताल में भर्ती एवं रोगी होने का कारक भी बन रहा है| बुध जहॉं चतुर्थेश होकर छाती, श्‍वसनतन्त्र एवं फेफड़ों का कारक बन रहा है, वहीं सप्तमेश होकर मारकेश भी है| बुध अष्टमेश शुक्र के नक्षत्र में है, इस प्रकार दशाएँ एक ओर छाती, श्‍वसनतन्त्र एवं फेफड़ों से सम्बन्धित संक्रामक-घातक रोग का कारक बन रही हैं, वहीं मारकेश के रूप में फलदायक हैं| 89 वर्ष की अवस्था में थी, इसी कारण मृत्यु के रूप में फल प्राप्त हुआ|
उदाहरण 6 : पैट्रिक डेवेजियन
जन्म दिनांक : 26 अगस्त, 1944
जन्म समय : 09:00 बजे
जन्म स्थान : फ्रांस
जन्मकुण्डली
फ्रांस के पूर्व मन्त्री एवं राजनेता पैट्रिक डेवेजियन की 29 मार्च, 2020 को 75 वर्ष की आयु में कोरोना वायरस के कारण पेरिस में मृत्यु हो गई| मृत्यु के समय वे चन्द्रमा की महादशा में शनि की अन्तर्दशा में बुध की प्रत्यन्तर्दशा के प्रभाव में थे| महादशानाथ चन्द्रमा तृतीय भाव में अपनी नीच राशि में चतुर्थेश-सप्तमेश गुरु के नक्षत्र में है| अन्तर्दशानाथ शनि पंचमेश-षष्ठेश होकर दशम भाव में राहु के नक्षत्र में है| प्रत्यन्तर्दशानाथ बुध लग्नेश होकर द्वादश भाव में वक्री स्थिति में द्वादशेश सूर्य, चतुर्थेश-सप्तमेश गुरु तथा दूसरे मारकेश शुक्र के साथ स्थित है|
इस युति पर शनि की भी पूर्ण दृष्टि है| चतुर्थेश गुरु एवं श्‍वसनतन्त्र का नैसर्गिक कारक बुध दोनों ही द्वादश भाव में निर्बल एवं पीड़ित स्थिति में हैं, पापकर्तरि में हैं और पाप प्रभाव में हैं| शनि की अन्तर्दशा रोग भाव के साथ-साथ नैसर्गिक प्रभाव से मारक प्रभाव भी रखती है| बुध यद्यपि लग्नेश है, परन्तु अस्पताल के भाव द्वादश में स्थित है, वक्री और संधिगत स्थिति में है तथा दोनों मारकेशों के साथ युत है| बुध के पश्‍चात् आने वाली केतु एवं शुक्र की प्रत्यन्तर्दशाएँ भी राहतकारी नहीं थीं| आयु भी 75 वर्ष होने के कारण इन दशाओं ने मारक फल ही प्रदाए किए|
उदाहरण 7 : प्रिंस चार्ल्स
जन्म दिनांक : 14 नव., 1948
जन्म समय : 21:14 बजे
जन्म स्थान : लन्दन (इंगलैंड)
जन्मकुण्डली
प्रिंस चार्ल्स मार्च, 2020 में गुरु की महादशा में केतु की अन्तर्दशा में सूर्य की प्रत्यन्तर्दशा में करोनावायरस से ग्रस्त हुए| अन्तर्दशानाथ केतु प्रत्यन्तर्दशानाथ सूर्य के साथ चतुर्थ भाव में स्थित है| बुध जो श्‍वसन तन्त्र का नैसर्गिक कारक है, वह भी चतुर्थ भाव में सूर्य-केतु के साथ ही है|
केतु वायरस संक्रमण का कारक है तथा छाती-फेफड़े के भाव चतुर्थ में स्थित है| सूर्य भी चतुर्थ भावस्थ होकर नीचराशिस्थ है तथा सन्धिगत स्थिति में है| रोगेश गुरु के नक्षत्र में है| इसी कारण ये रोगग्रस्त हुए| सूर्य की प्रत्यन्तर्दशा के पश्‍चात् 26 मार्च से चन्द्रमा की प्रत्यन्तर्दशा आयी, जो कि राहतकारी सिद्ध हुई| फलत: वे इस रोग से मुक्त हो गए|
उदाहरण 8
बोरिस जॉनसन
जन्म दिनांक : 19 जून, 1964
जन्म समय : 14:00 बजे
जन्म स्थान : न्यूयॉर्क (अमेरिका)
जन्मकुण्डली
इंगलैण्ड के प्रधानमन्त्री बोरिस जॉनसन भी मार्च, 2020 में कोरोना वायरस के प्रभाव में आए थे और इन्हें कुछ दिन अस्पताल में रहना पड़ा| उस दौरान ये बुध महादशा में शुक्र की अन्तर्दशा में शुक्र की प्रत्यन्तर्दशा के प्रभाव में थे| अन्तर्दशानाथ-प्रत्यन्तर्दशानाथ शुक्र यद्यपि द्वितीयेश होकर मारकेश है और वक्री एवं अस्तंगत है, परन्तु ज्योतिष का सिद्धान्त है कि मारकेश अकेला मारक प्रभाव नहीं देता, वरन् अन्य मारक प्रभाव देने वाले ग्रह की भी दशा आवश्यक है| मारकेश ने मृत्यु का भय अवश्य प्रदान किया| शुक्र यहॉं राजयोगकारक भी है| कर्मेश-भाग्येश में राशि-परिवर्तन सम्बन्ध से श्रेष्ठ राजयोग का निर्माण हो रहा है| भाग्येश के साथ द्वादशेश सूर्य की युति तथा कर्मेश बुध के साथ अष्टमेश मंगल की युति जन्मस्थान (न्यूयॉर्क) से दूर इंगलैंड में भाग्योन्नति एवं राजयोग प्रदान कर रही है| इसके अतिरिक्त मारक प्रभाव आयु के अन्तिम वर्षों में आता है, अन्यथा यदि वह राजयोग निर्माता ग्रहों से सम्बन्धित है अथवा स्वयं राजयोग निर्माता ग्रहों से सम्बन्धित है अथवा स्वयं राजयोग निर्माता है, जो कॅरिअर से सम्बन्धित शुभ फल ही प्रदान करता है|•
ज्‍योतिष सागर, मई, 2020 अंक में प्रकाशित