डाउ़िंजग पेड़ की टहनी या धातु की छड़ से भविष्यवाणी

वैकल्पिक ज्‍योतिष

डाउ़िंजग एक ऐसी रहस्यमयी विधा है, जिसके अन्तर्गत भूमि में दबी वस्तुओं, जल की गहराई, विभिन्न धातुओं, बहुमूल्य रत्नों, भूमिगत तेल या हड्डियों का पता लगाया जाता है| यह कार्य पेड़ की छोटी टहनी या तॉंबा, पीतल इत्यादि धातुओं की छड़ की सहायता से किया जाता है| सर्वाधिक रूप से भूमिगत जल का पता लगाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है| इस कार्य में किसी प्रकार के वैज्ञानिक उपकरण का प्रयोग नहीं होता है, बल्कि धरती से निकल रही तरंगों का ही प्रयोग इसमें होता है| डाउ़िंजग में जिस छड़ या टहनी का प्रयोग किया जाता है, वह अंग्रेजी के ध या ङ आकार में बनी होती है| ऐसा माना जाता है कि इसका प्रारम्भ १५ वीं शताब्दी में जर्मनी से हुआ और फिर धीरे-धीरे यह सभी जगह लोकप्रिय हो गई| मार्टिन लूथर भी इस कला से बेहद प्रभावित थे| १९ वीं सदी तक यह इंग्लैण्ड की जनता में सामान्य रूप से प्रचलित जादुई विधा हो गई थी| १९६० में वियतनाम युद्ध के दौरान युनाईटेड स्टेट्‌स की नौसेना द्वारा सुरंगों में दबे हुए हथियारों को खोजने के लिए इसी का सहारा लिया गया था|
हालांकि इसके पीछे अभी तक किसी प्रकार का वैज्ञानिक आधार स्वीकार नहीं किया गया है| जो छड़ इस कार्य में प्रयुक्त की जाती है, उसे ‘दिव्य छड़’ कहा जाता है| पारम्परिक रूप से ध आकार की छड़ का प्रयोग इस कार्य हेतु अधिक किया जाता है| कुछ लोग इस कार्य के लिए किसी भी पेड़ की टहनी काम में ले लिया करते हैं, तो कुछ लोग ‘विलो’ या ‘पीच’ (आडू) जैसे विशेष पेड़ों की टहनी ही इस कार्य हेतु प्रयोग में लेते हैं| इसका प्रयोग करते समय डाउ़जर टहनी को अपने साथ लेकर संभावित स्थान पर जाता है| ऐसा माना जाता है कि जैसे ही पानी वाले स्थान पर या जमीन में दबी हुई वस्तु वाले स्थान पर वह टहनी या छड़ पहुँचती है, वैसे ही वहॉं पहुँचकर वह छड़ अपने आप जमीन की ओर खिंचने लगती है| यह झुकाव बहुत धीमी गति से होता है, इसलिए डाउ़िंजग का जानकार व्यक्ति ही अपनी अन्त:प्रज्ञा से इसे अनुभव कर पाता है|
भूमिगत वस्तुओं का पता लगाने के अतिरिक्त किसी प्रश्‍न का उत्तर ‘हॉं’ या ‘नहीं’ में जानने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है| इसके लिए छड़ को हवा में लटका दिया जाता है और तब डाउ़जर छड़ से कार्य के होने या नहीं होने के सम्बन्ध में प्रश्‍न करता है| यदि प्रश्‍न पूछने के बाद छड़ में किसी प्रकार का कम्पन या हलचल होती है, तो इसका अर्थ है कि पूछा गया कार्य हो जाएगा, लेकिन यदि छड़ बिल्कुल भी नहीं हिले, तो इसका अर्थ है कि पूछा गया कार्य नहीं होगा| ऐसा माना जाता है कि इस प्रकार की भविष्यवाणियॉं दिव्य आत्माओं या भगवान् की कृपा से ही की जाती है|•