कब प्रभावी होती हैं जातक पर शैतानी शक्तियॉं?

चिकित्‍सा ज्‍योतिष

किसी व्यक्ति की आत्मा अथवा शरीर पर किसी शैतानी शक्ति के हावी होने के बारे में आपने सुना होगा| यह अंधविश्‍वास है, कोरी कल्पना है अथवा सत्य? यह सिद्ध करने के लिए आज के विज्ञान ने भी भरपूर प्रयास किए हैं| कई अनुसंधानों एवं प्रयोगों से यह सिद्ध हो चुका है कि आत्मारूपी शक्ति का अस्तित्व होता है| यह शक्ति कई बार हमारे इर्द-गिर्द भी हो सकती है| इन शक्तियों में नकारात्मक एवं सकारात्मक दोनों ही प्रकार के गुण होते हैं| कुछ आत्माएँ अपनी वासनाओं से अतृप्त रहने के कारण उस लोक में विचरण करती रहती हैं और अपनी वासना की तृप्ति के लिए कई प्रकार के साधन अपनाती हैं| कई बार ऐसी आत्माएँ सामान्य व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर अथवा किसी अन्य रूप से उसे नुकसान पहुँचाती हैं| आखिर ये बुरी शक्तियॉं किस प्रकार के व्यक्तियों को नुकसान पहुँचा सकती है, यह अनुंसधान भी परामनोविज्ञान के अंतर्गत किया जा रहा है|
ज्योतिष भी आत्माओं के रहस्यों से अनभिज्ञ नहीं है| ज्योतिष में आत्मा के सामान्य मनुष्यों पर प्रभाव का अनुसंधान कई विद्वानों ने किया है| इस अनुसंधान के अंतर्गत आत्माएँ किस प्रकार के जातकों पर प्रभावी होकर अपनी वासनाओं की पूर्ति करती हैं, यह जानने की कोशिश की गई है|
वास्तव में कोई अतृप्त आत्मा जो अपनी इच्छाओं की पूर्ति करना चाहती है, वह एक ऐसे व्यक्ति को तलाशती है, जो मानसिक रूप से दृढ़ नहीं हो, लेकिन वे कमजोर शरीर एवं मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्तियों को नहीं चुनती हैं| उनका लक्ष्य वे व्यक्ति होते हैं, जो सामान्यत: आचार-व्यवहार में सामान्य व्यक्ति के समान ही होते हैं, लेकिन ग्रह स्थितियॉं कमजोर होने के कारण वे जल्दी ही इनकी गिरफ्त में आ जाते हैं|
कई बार व्यक्ति के मानसिक रोगों को ही किसी आत्मा का प्रकोप समझ लिया जाता है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता| मनोरोगों से अनभिज्ञ व्यक्ति इन्हें भी आत्माओं का प्रकोप समझ जाते हैं| इस कमजोर मानसिकता के कारण ही अंधविश्‍वास ऐसे समाज में विशेष रूप से पनपता है|
कोई व्यक्ति किसी ऊपरी बाधा से पीड़ित है अथवा किसी मनोरोग से, यह ज्ञात करने के लिए जब उसकी जन्मपत्रिका देखी जाए, तो कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्यों का अवश्य अध्ययन करना चाहिए| सर्वप्रथम इसके लिए उस जातक के पिछले कुछ माह के भूतकाल को जानना चाहिए| उसकी जन्मपत्रिका में लग्न, लग्नेश, शनि, राहु-केतु की स्थिति एवं अष्टम-अष्टमेश की स्थिति जाननी चाहिए| उक्त स्थिति से भी अधिक यह जानना आवश्यक है कि जिस समय वह ऊपरी बाधा अथवा मानसिक समस्या से ग्रस्त हुआ, उस समय किस ग्रह की दशा चल रही थी| इन दोनों ही प्रकार की समस्याओं के योग लगभग समान ही होते हैं| इसका पता हमें उस जातक के कुछ समय पूर्व के इतिहास के आधार पर तथा जन्मपत्रिका में अष्टम-अष्टमेश तथा चन्द्रमा की स्थिति से ज्ञात हो जाता है जैसे; किसी मानसिक समस्या के लिए मुख्य रूप से चन्द्रमा एवं लग्न-लग्नेश की भूमिका होगी, वहीं ऊपरी बाधा के लिए लग्न-लग्नेश के साथ अष्टम-अष्टमेश तथा शनि-राहु की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी|
सामान्यत: किसी भी व्यक्ति पर शैतानी आत्माएँ तभी हावी हो सकती हैं, जब गोचर में लग्नेश की स्थिति कमजोर हो तथा अष्टमेश की स्थिति बली| साथ ही अष्टमेश, शनि, राहु अथवा केतु की दशा अथवा अन्तर्दशा चल रही होऔर इन ग्रहों का सम्बन्ध किसी न किसी प्रकार से लग्न और अष्टम भाव से भी हो रहा हो|
जब भी ऐसी स्थिति में इन ग्रहों की दशा अथवा अन्तर्दशा आ जाए एवं गोचर में लग्नेश कमजोर एवं अष्टमेश बली हो जाए, तो अपने इष्ट की पूजा-अर्चना में पूर्ण ध्यान लगा देना चाहिएएवं अपने आपको व्यस्त रखना चाहिए|
जो व्यक्ति इन बुरी आत्माओं के चपेट में आ चुके हैं, उन्हें ईश्‍वर की शरण लेना ही श्रेष्ठ है| •
आध्यात्मिक वातावरण में अधिकाधिक रूप से रहने से व्यक्ति पुन: अपनी आत्मशक्ति को प्राप्त करने लगता है, जिससे धीरे-धीरे वह बुरी आत्मा उस शरीर को छोड़ देती है|•