क्या करें विजयादशमी पर …

तन्‍त्र-मन्‍त्र-यन्‍त्र

अपराजिता पूजा
अपराजिता देवी यात्रा-कार्यों में सफलता और युद्ध-प्रतिस्पर्द्धा में विजय दिलाने वाली देवी है| विजयादशमी पर इसकी पूजा की जाती है|
कहॉं होगी पूजा? : ग्राम, मोहल्ला या कॉलोनी के बाहर ईशान दिशा में पूजा होती है|
कब होती है पूजा? : अपराजिता की पूजा सायंकाल होती है|
किनकी होगी पूजा? : एक थाली में चंदन से मध्य में अपराजिता देवी, बायीं ओर उमा देवी और दायीं ओर जया देवी का चित्र बनाएँ| इन तीनों देवियों की ही पूजा होती है|
पहली पूजा जया देवी की : पहली पूजा जया देवी की होती है| इस मन्त्र से उनका आवाहन करें : ॥ ॐ क्रियाशक्त्यै नम:॥
इस मन्त्र से उनकी पूजा करें : ॥ ॐ जयायै नम:॥
दूसरी पूजा उमा देवी की : जया देवी के उपरान्त उमा देवी की पूजा की जाती है| इस मन्त्र से आवाहन करें : ॥ ॐ उमायै नम:॥ और ॥ ॐ विजयायै नम:॥ मन्त्र से पूजन करें|
प्रधान पूजा : प्रधानपूजा में अपराजिता देवी की पूजा की जाती है| इस हेतु अपराजिता देवी का इस मन्त्र से आवाहन करें : ॥ ॐ अपराजितायै नम:॥ और इसी मन्त्र से ही देवी का पूजन करें|
प्रार्थना : अन्त में तीनों देवियों से प्रार्थना करें :
इमां पूजां मया देवि यथाशक्ति निवेदिताम्‌॥
रक्षार्थं तु समादाय व्रज स्वस्थानमुत्तमम्‌॥
शमी पूजन

अमंगल एवं पापनाश हेतु और विजय एवं कल्याण के लिए शमी (खेजड़ा) के वृक्ष की पूजा की जाती है|
प्रदक्षिणा एवं संकल्प : शमी वृक्ष के पास जाकर उसकी प्रदक्षिणा करें एवं हाथ में अक्षत पुष्पादि लेकर निम्न वाक्य का उच्चारण करते हुए संकल्प करें :
ॐ विष्णु: विष्णु: विष्णु: मम दुष्कृता अमंगलादिनिरासार्थं क्षेमार्थयात्रायां विजयार्थं च शमीपूजां करिष्ये|
कैसे होगी पूजा? : पूजन हेतु स्वस्तिवाचन, दिक्पाल पूजन एवं वास्तुपूजन करें एवं पंचोपचार या षोडशोपचार से निम्न मन्त्र का उच्चारण करते हुए शमी वृक्ष का पूजन करें :
अमंगलानां शमनीं शमनीं दुष्कृतस्य च|
दु:स्वप्ननाशिनी धन्यां प्रपद्येहं शमी शुभाम्‌॥

अन्त में क्या करें? : उपर्युक्त प्रकार से शमी वृक्ष का पूजन करने के पश्‍चात् निम्न मन्त्र का उच्चारण करते हुए प्रार्थना करें :
शमी शमयते पापं शमी लोहितकंटका|
धरित्र्यर्जुनबाणानां रामस्य प्रियवादिनी॥
करिष्यमाणयात्रायां यथाकालं सुखं मया|
तत्र निर्विघ्नकर्त्री त्वं भय श्रीरामपूजिते॥

अन्त में शमी वृक्ष की जड़ को मिट्टी सहित अपने घर ले आएँ|