मेष राशि

Jupiter

मेष राशि (चू, चे, चो, ला, ली, लु, ले, लो, आ)
मेष राशि वालों के लिए गुरु का वृश्‍चिक राशि में गोचर जन्मराशि से अष्टम भाव में रहेगा| अष्टमस्थ गोचर सामान्यत: शुभफलप्रद नहीं माना जाता| विभिन्न क्षेत्रों में गुरु का यह गोचर निम्नानुसार रहेगा :
सामान्य फल : ज्योतिष ग्रन्थों के अनुसार जन्मराशि से अष्टम भाव में गुरु का गोचर प्राय: सभी क्षेत्रों में प्रतिकूल फलदायक होता है| इसलिए गुरु के अष्टम गोचर की अवधि में आपको सभी क्षेत्रों में सावधानी रखने की आवश्यकता है| यह गोचरावधि शान्ति एवं सावधानीपूर्वक व्यतीत करनी चाहिए| इस दौरान पारिवारिक समस्याओं में वृद्धि हो सकती है| नौकरी एवं व्यवसाय से सम्बन्धित समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं| स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है| अष्टम भाव का प्रतिवेध स्थान सप्तम भाव है| इस प्रकार जब-जब तुला राशि में अन्य ग्रहों का गोचर होगा, तब-तब गुरु के अशुभ फलों में कमी का अनुभव होगा| चूँकि वृश्‍चिक राशि गुरु की मित्र राशि है, इसलिए इस राशि में गुरु के अशुभ फलों की तीव्रता अपेक्षाकृत कम रहनी चाहिए| आपकी चन्द्रकुण्डली में गुरु भाग्येश एवं द्वादशेश है| भाग्येश का अष्टम भाव में गोचर करना शुभ फलदायक नहीं होता|
स्वास्थ्य : स्वास्थ्य की दृष्टि से गुरु की वृश्‍चिक राशि में गोचरावधि सावधानीपूर्वक व्यतीत करनी चाहिए| इस दौरान स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियॉं उत्पन्न हो सकती हैं| लिवर, पित्ताशय, पित्त की नली, किडनी एवं उदर से सम्बन्धित रोग होने की आशंका रहेगी, वहीं पीलिया, ज्वर एवं आकस्मिक रोगों के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है| खान-पान में सावधानी रखें, यदि आप पहले से ही किसी दीर्घकालिक बीमारी से पीड़ित हैं, तो इस दौरान इन बीमारियों के सम्बन्ध में भी सावधान रहने की आवश्यकता है| वाहनादि चलाते समय भी सावधानी रखें| खाद्य पदार्थ एवं पेयजल से सम्बन्धित इनफेक्शन होने की भी आशंका है|
परिवार एवं समाज : पारिवारिक मामलों में जन्मराशि से अष्टम भाव में गुरु का गोचर शुभ नहीं कहा जा सकता| इस दौरान गृहक्लेश बढ़ सकते हैं| पति एवं सन्तान के सम्बन्ध में चिन्ता रह सकती है| घर में अनावश्यक वाद-विवाद में वृद्धि हो सकती है| परिजनों से दूर रहने की परिस्थितियॉं बन सकती हैं| इस दौरान विवाह योग्य युवक-युवतियों को भी विवाह के लिए इन्तजार करना पड़ सकता है| जहॉं तक सामाजिक मान-प्रतिष्ठा का प्रश्‍न है, तो अष्टम भाव में गोचर शुभफलदायक नहीं है| अपमान एवं अपयश की परिस्थितियॉं बन सकती हैं, वहीं विचारों में नकारात्मकता एवं नास्तिकता आदि भी आ सकती है|
आर्थिक स्थिति : गुरु का वृश्‍चिक राशि में गोचर मेष राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में सावधानी रखने की अपेक्षा रख रहा है| आय के नियमित स्रोतों में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है| आकस्मिक रूप से खर्चों में वृद्धि तथा चोरी, हानि इत्यादि के कारण घरेलू अर्थ व्यवस्था प्रभावित हो सकती है| इस दौरान जोखिमपूर्ण धननिवेश नहीं करना चाहिए और न ही किसी को उधार देना चाहिए| व्यय की अधिकता के कारण ॠण लेने की परिस्थितियॉं भी बन सकती हैं|
नौकरी एवं व्यवसाय : नौकरी वालों के लिए यह गोचरावधि शुभ नहीं कही जा सकती| इस दौरान कार्यालय में विभिन्न प्रकार के तनावों का सामना करना पड़ सकता है| उच्चाधिकारी से सम्बन्धों में तनाव हो सकता है| कार्य की अधिकता परेशान कर सकती है| पदोन्नति आदि में अवरोध आदि का सामना करना पड़ सकता है| इस दौरान नियमों एवं कानूनों का उल्लंघन न करें और षड्‌यंत्रों आदि से भी सावधान रहें|
व्यवसायियों के लिए भी यह गोचरावधि सावधानी रखने योग्य है| व्यवसाय में मन्दी का सामना करना पड़ सकता है| व्यवसाय में अपेक्षित प्रगति न होने से तनाव रह सकता है| इस अवधि में उधार आदि देने से बचना चाहिए| सरकारी नियमों का पालन करना चाहिए| कर चोरी, सरकारी नियमों का उल्लंघन इत्यादि के कारण परेशानी हो सकती है|
अध्ययन एवं परीक्षा : विद्यार्थियों की दृष्टि से यह गोचरावधि बाधा कारक है| अध्ययन में बाधा का अनुभव होगा| कुसंगति, दुर्व्यसन अथवा अध्यनेतर गतिविधियों से अध्ययन सुचारू नहीं रह पाएगा| परीक्षा परिणाम भी अपेक्षानुरूप नहीं रहने से मन खिन्न हो सकता है|
उपाय : गुरु के अष्टम भावगत गोचर के अशुभ फलों में कमी करने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए :
1. दसमुखी रुद्राक्ष सोमवार अथवा किसी शुभ मुहूर्त में गले में धारण करना चाहिए|
2. ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:|’ मन्त्र का नित्य जप करना चाहिए|
3. श्रीलक्ष्मीनारायण जी की नित्य पूजा करनी चाहिए|
4. सम्भव हो सके, तो विष्णुसहस्रनाम स्तोत्र का नित्य पाठ करना चाहिए|
5. अपने गोत्र ॠषि का चित्र घर में स्थापित कर उन्हें नित्य धूप-दीप दिखाना चाहिए|
6. माता-पिता एवं गुरुजन के नित्य चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए|•