ऐसे मुक्त हों कार्यालय के वास्तुदोषों से

वास्‍तु

किसी भी कार्यालय की प्रगति के लिए और व्यापारिक उन्नति के लिए उस कार्यालय का वास्तु अनुकूल होना उतना ही आवश्यक है जितना कि उस कार्यालय के कर्मचारियों का मेहनती और ईमानदार होना| कई बार हम देखते हैं कि किसी कार्यालय में कर्मचारी परिश्रम कर रहे हैं, बाजार की स्थितियॉं भी अनुकूल हैं फिर भी सही परिणाम प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं| जब हम इसके पीछे के कारणों को देखते हैं, तो उसमें कई कारण उभरकर आते हैं, जिनमें से वास्तुदोष भी एक कारण हो सकता है, अत: वास्तु सम्बन्धी सभी दोषों का निवारण कर अपनी शंका को समाप्त कर लेना चाहिए, क्योंकि कार्यालय का वास्तु पूर्ण रूप से कार्यालय के स्वामी, कर्मचारी और उस कार्यालय से जुड़े प्रत्येक पक्ष को प्रभावित करता है|
कार्यालय में आकारगत, दिशागत वास्तु के साथ ही आन्तरिक वास्तु की व्यवस्था भी महत्त्वपूर्ण होती है, अत: प्रस्तुत लेख में कार्यालय सम्बन्धी समस्त वास्तुदोषों का उल्लेख करते हुए उनके निवारणार्थ उपायों का उल्लेख भी किया जाएगा|
आकार सम्बन्धी वास्तुदोष एवं उनके निवारण के उपाय
किसी भी कार्यालय के वास्तु का विचार करने से पूर्व सर्वप्रथम उसकी आकारगत स्थिति को देखना चाहिए| यदि कार्यालय का कोई भी हिस्सा घटा या बढ़ा हुआ हो, तो उसका प्रयोग नहीं करना चाहिए और उसे किसी भी प्रकार के विभाजन से पृथक् कर देना चाहिए|
द्वार एवं खिड़कियों सम्बन्धी वास्तुदोष एवं निराकरण के उपाय
कार्यालय का द्वार हमेशा पूर्व अथवा उत्तर दिशा में होना चाहिए| पूर्व, उत्तर के अतिरिक्त ईशान कोण से भी कार्यालय का द्वार हो सकता है| कार्यालय में खिड़कियॉं अधिक रूप से इसी दिशा में होनी चाहिए| द्वार यदि एक से ज्यादा हैं, तो वह इन दिशाओं के अतिरिक्त पश्‍चिम दिशा में भी हो सकता है, लेकिन कभी भी दक्षिण नैर्ॠत्य में द्वार नहीं होना चाहिए| खिड़कियॉं भी सम संख्या में होनी चाहिए तथा दक्षिण अथवा नैर्ॠत्य में होना अश्ाुभ होगा| यदि इस दिशा में खिड़कियॉं स्थित हैं, तो उन्हें बन्द करके पर्दों से ढककर रखना चाहिए| इसी प्रकार इस दिशा में द्वार स्थित होने पर सर्वप्रथम पूर्व अथवा उत्तर दिशा में एक उपद्वार का निर्माण करें| साथ ही दक्षिण नैर्ॠत्य में स्थित द्वार को हमेशा के लिए बन्द कर दें| यदि इस द्वार को प्रयोग लेना मजबूरी हो, तो उत्तरी ईशान अथवा पूर्वी ईशान में एक दर्पण को इस प्रकार स्थित करें कि दक्षिण एवं नैर्ॠत्य दिशा में स्थित द्वार उस दर्पण में प्रतिबिम्बित हो सके|
रिसेप्शन की व्यवस्था
आध्ाुनिक कार्यालय में स्वागत कक्ष अथवा रिसेप्शन रूम अवश्य होता है, जिसमें आगन्तुक की समस्याओं का प्राथमिक निराकरण किया जाता है| स्वागत कक्ष को कार्यालय के ईशान, उत्तर अथवा पूर्व दिशा में बनाना चाहिए| स्वागत अधिकारी का मुँह पूर्व अथवा उत्तर दिशा में होना चाहिए, जबकि आगन्तुक का मुँह पश्‍चिम या दक्षिण दिशा में होना चाहिए|
मुख्याधिकारी की केबिन
कार्यालय के प्रमुख अधिकारी का केबिन नैर्ॠत्य कोण अथवा उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए| उसकी केबिन में बैठने की व्यवस्था इस प्रकार की हो कि उनका मुँह उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर हो| केबिन में कम्प्यूटर को आग्नेय कोण में रखा जाना चाहिए| कम्प्यूटर की टेबल और अधिकारी की मुख्य टेबल अलग-अलग होनी चाहिए| सोफा सेट को दक्षिण अथवा पश्‍चिम दिशा में रखना चाहिए| दक्षिण दिशा में टॉयलेट होना चाहिए| यह अवश्य ध्यान रहे कि अधिकारी का मुँह टॉयलेट के दरवाजे की ओर नहीं हो| उत्तर अथवा पूर्व की दीवार पर दर्पण लगाया जा सकता है| मुख्य अधिकारी की केबिन का दरवाजा पूर्व अथवा उत्तर दिशा में ख्ाुलना चाहिए| इस दिशा में पारदर्शी खिड़कियॉं होनी चाहिए| इस केबिन में अलमारियॉं दक्षिण और पश्‍चिम दिशा में हों साथ ही ईशान और पूर्व दिशा में फ्लावर पॉट रखे जा सकते हैं|
मुख्य अधिकारी के अधीनस्थ अधिकारियों की केबिन
इन अधिकारियों की केबिन पश्‍चिम दिशा में होनी चाहिए| यदि पश्‍चिम दिशा में संभव नहीं हो, तो दक्षिण दिशा भी इसके लिए उपयुक्त है| लेखा विभाग ईशान कोण, उत्तर अथवा पूर्व दिशा में होना चाहिए| केबिन की आन्तरिक साज-सज्जा मुख्य अधिकारी की केबिन की भॉंति की जा सकती है|
कर्मचारियों की केबिन
कर्मचारियों के बैठने का स्थान दक्षिण और पश्‍चिम दिशा में रखा जा सकता है| यह अवश्य ध्यान रहे कि प्रमुख कार्यों को करने वाले अधिकांश कर्मचारियों का मुख बैठते समय उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर हो|
कैशियर की केबिन
कार्यालय में कैशियर की केबिन भी मुख्य अधिकारी की भॉंति महत्त्वपूर्ण होती है| उसे उत्तर दिशा की ओर बनाना चाहिए| कैशियर बैठते समय उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर मुख रखे| तिजोरी को उत्तर दिशा में लगाना चाहिए| केबिन की अन्य साज-सज्जा मुख्य अधिकारी की केबिन की साज-सज्जा के अनुसार की जा सकती है|
अभिलेख या फाइलें रखने का स्थान
अभिलेख या फाइलें आध्ाुनिक कार्यालयों का प्रमुख अंग होती हैं| फाइलों को रखने के लिए बड़े कार्यालयों में पृथक् कक्ष की स्थापना की जाती है| इस प्रकार का कक्ष नैर्ॠत्य कोण में बनाया जा सकता है| यदि नैर्ॠत्य में संभव नहीं हो, तो दक्षिण और पश्‍चिम दिशा भी दूसरा विकल्प हो सकती हैं|
मन्दिर
कार्यालय में मन्दिर की स्थापना ईशान, पूर्वी ईशान, उत्तरी ईशान में होनी चाहिए| यदि यह संभव नहीं हो, तो उत्तर दिशा में भी मन्दिर हो सकता है| मन्दिर में वास्तुदोष निवारक कवच की स्थापना अवश्य करनी चाहिए| यह कवच आपके कार्यालय के विभिन्न प्रकार के वास्तुदोषों को समाप्त करने की शक्ति रखता है| इसे मन्दिर के अतिरिक्त किसी बड़े वास्तुदोष के स्थान पर भी स्थापित किया जा सकता है|
जल व्यवस्था
पीने वाले जल की व्यवस्था मन्दिर के दायीं या बायीं ओर होना चाहिए अर्थात् पूर्वी ईशान या उत्तरी ईशान में होनी चाहिए| यदि यहॉं संभव नहीं हो, तो पूर्व दिशा में भी यह व्यवस्था हो सकती है|
सीढ़ियॉं
कार्यालय में सीढ़ियॉं दक्षिण अथवा पश्‍चिम दिशा की ओर होनी चाहिए| यदि ईशान अथवा पूर्व दिशा में सीढ़ियॉं स्थित हैं, तो उन्हें वहॉं से हटा दें| यदि यह संभव नहीं हो, तो इन्हें दक्षिणी भाग में दर्पण द्वारा प्रतिबिम्बित किया जा सकता है| सीढ़ियों के नीचे वाले भाग में क्रिस्टल बॉल या बॉंसुरियों की झालर का प्रयोग करना चाहिए|
टॉयलेट
कार्यालय में टॉयलेट की व्यवस्था दक्षिण नैर्ॠत्य अथवा पश्‍चिम दिशा में होनी चाहिए| यदि यहॉं संभव नहीं हो, तो उत्तरी वायव्य में भी टॉयलेट हो सकता है| ईशान, आग्नेय और पूर्व दिशा में कभी भी टॉयलेट नहीं होना चाहिए| यदि इस दिशा में यह स्थित है, तो इसे हटा दें| यदि हटाना संभव नहीं हो, तो इसे दीवार खींचकर अथवा लकड़ी की प्लाई का प्रयोग करके इस प्रकार विभाजित करें कि यह कार्यालय से पूर्ण रूप से पृथक् नजर आए| साथ ही पश्‍चिम दिशा में एक दर्पण का ऐसा प्रयोग करें, जिससे यह टॉयलेट प्रतिबिम्बित हो सके|
एसी, कूलर अथवा डक्टिंग की व्यवस्था
कार्यालय में एसी, कूलर आदि की व्यवस्था वायव्य अथवा उत्तर दिशा में होनी चाहिए| यदि यहॉं संभव नहीं हो, तो पश्‍चिमी वायव्य तथा उत्तरी ईशान में भी यह व्यवस्था संभव है|
उपर्युक्त सभी वास्तुदोषों का शमन करने के पश्‍चात् निश्‍चित रूप से आप अपने कार्यों में उन्नति महसूस करेंगे| कार्यालय आपके व्यवसाय का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है|•