अग्नि की लपटों से भविष्य

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प्राचीन काल से ही अग्नि का धार्मिक महत्त्व रहा है| यह दैनिक आवश्यकता की एक वस्तु तो थी ही, साथ ही इसे एक देवता के रूप में भी पूजा गया| यही कारण है कि इसे भी भविष्य बताने वाले एक साधन के रूप में प्रयुक्त कर लिया गया| अग्नि से भविष्यकथन की विधा आधुनिक नहीं है, बल्कि बहुत पुरानी है| ऐसा माना जाता है कि ग्रीक सभ्यता के मन्दिरों में नित्य इसका अभ्यास किया जाता था| प्राचीन चीन में भी अग्नि से भविष्य बताने की विधा बहुत अधिक प्रचलित थी| वहॉं अग्नि में हड्डियॉं अथवा पत्थर तपाकर उनसे भविष्य देखा जाता था|
अग्नि से भविष्य बताने की विधाओं में सर्वाधिक प्रचलित तरीका है, जलती हुई अग्नि की लपटों में बनी आकृतियों से भविष्य बताना| इसके लिए पारम्परिक रूप से पवित्र आग जलाकर, मोमबती जलाकर या अन्य किसी तरीके से आग की लपटें उत्पन्न की जाती थीं| अग्नि की लपटों से भविष्य बताने की इस विधा को अनेक वर्गों में विभक्त किया गया है :
अलोमेन्सी : जलती हुई अग्नि में नमक डालकर उससे आकृतियॉं उत्पन्न करना|
बोटनोमेन्सी : जलती हुई अग्नि में पेड़ों की पत्तियॉं या टहनियॉं डालकर उनसे बनी आकृतियॉं देखना|
केप्नोमेन्सी : अग्नि के धुएँ को देखकर उसके हलके, गहरे, रंगीन, रंगहीन, उर्ध्वगमन इत्यादि से भविष्यकथन करना|
कोजिनोमेन्सी : साधारण रूप से जलती हुई अग्नि की लपटों को देखकर भविष्यकथन करना|
ओस्टियोमेन्सी : अग्नि में हड्डियॉं जलाकर उन हड्डियों पर बनी दरारों से भविष्यकथन करना
सिड्रियोमेन्सी : अग्नि में लोहे की बनी नलकी जलाकर उससे आकृतियॉं उत्पन्न करना और भविष्यकथन करना|•